Jan 29, 2013

एक सुनार था। उसकी दुकान से मिली हुई एक लुहार की दुकान थी.....


एक सुनार था। उसकी दुकान से मिली हुई एक लुहार की दुकान थी। सुनार जब काम करता, उसकी दुकान से बहुत ही धीमी आवाज होती, पर जब लुहार काम करतातो उसकी दुकान से कानो के पर्दे फाड़ देने वाली आवाज सुनाई पड़ती।

एक दिन सोने का एक कण छिटककर लुहार की दुकान में आ गिरा। वहां उसकी भेंट लोहे के एक कण के साथ हुई।
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सोने के कण ने लोहे के कण से कहा, "भाई, हम दोनों का दु:ख समान है। हम दोनों को एक ही तरह आग में तपाया जाता है और समान रुप से हथौड़े की चोटें सहनी पड़ती हैं। मैं यह सब यातना चुपचाप सहन करता हूं, पर तुम...?"

"तुम्हारा कहना सही है, लेकिन तुम पर चोट करने वाला लोहे का हथौड़ा तुम्हारा सगा भाई नहीं है, पर वह मेरा सगा भाई है।" लोहे के कण ने दु:ख भरे स्वर में उत्तर दिया। फिर कुछ रुककर बोला, "पराये की अपेक्षा अपनों के द्वारा गई चोट की पीड़ा अधिक असह्म होती है।"

लड़का अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मेरेज रजिस्ट्रेशन ऑफिस गया

लड़का अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मेरेज
रजिस्ट्रेशन ऑफिस गया
लंच टाइम होने के कारण ऑफिस बंद थी
और ऑफिस के बहार एक बोर्ड में लिखा था
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दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक ऑफिस बंद रहेगी,
तब तक
एक बार फिर सोच ले

Jan 28, 2013

वो मई के महीने में Exam का बुखार और फिर गर्मी की छुट्टियों का इन्तजार बहुत याद आता है ..!!

वो मई के महीने में Exam का बुखार और फिर गर्मी की छुट्टियों का इन्तजार बहुत याद आता है ..!!

चिलचिलाती धूप में क्रिकेट खेलने जाना और बहिन का "काले हो जाओगे " कह कर चिढाना बहुत याद आता है ..!!
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आइसक्रीम वाले का गली में आकर चिल्लाना बहुत कहने पर भी मम्मी का आइसक्रीम न दिलाना .बहुत याद आता है ..!!

कच्चे आमों को गेंहू के बोरे में पकाना और उन्हें खाने से पहले पानी में भीगाना बहुत याद आता है ..!!

दिन में तीन चार बार हैंडपंप के ठन्डे पानी से नहाना अभी आ रहा हूँ कह कर फिर खेलने चले जाने का बहाना बहुत याद आता है ..!!

छोटी -छोटी बात में बहिन से लड़ जाना , उसकी गलती ना होते हुए भी माँ के सामने उसका आँशू बहाना बहुत याद आता है ..!!

सुबह शाम कूलर में पानी भरना , "पापा से शिकायत कर दूंगी " मम्मी का ये कह कर डराना बहुत याद आता है ..!!

बत्ती ना आने पर छत पर चटाई बिछा कर सोना और फिर वापिस स्कूल खुलने के गम में रोना बहुत याद आता है ..!!

सच ये सब बहुत याद आता है

भीख माँगने के तरीके और वेरायटी....


॰शनि महाराज की जय!

॰बेटा दो दिन से कुछ नहीँ खाया दो रूपया दे दो।
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॰पैर पकड़ता हुआ बच्चा मुँह से कुछ नहीँ पर इशारो से भोजन और पैसा माँगता हुआ।

॰मेरा पर्स चोरी हो गया फलाने जगह जाना है बीस रुपया दे दीजिये,कभी मिलियेगा तो लौटा देंगे।

॰डॉक्टर की ये पुर्जी देखिये दवा के लिये पैसे चाहिये।

॰आप लोग प्लीज मुझे ही वोट किजियेगा,
आगे हम आपका ख्याल रखेंगे।
भुलियेगा नहीं(स्टैण्डर्ड भिखारी जो है)

॰मेरी माँ भी रोई थी,दादी भी रोई थी अब हमारे खानदान से सारा देश रो रहा है।(भावनात्मक भिखारी)

॰अगर आप सच्चे भारतीय है तो मेरा पेज लाईक करे!
अगर आप माँ को प्यार करते है तो ये फोटो लाईक करे।
अगर आप सैनिको को पसंद करते है तो लाईक करे।(फेसबुकिया भिखारी भीख में लाईक दे दे रे बाबा)

एक बार की बात है कि एक बाज का अंडा मुर्गी के अण्डों के बीच आ गया...

एक बार की बात है कि एक बाज का अंडा मुर्गी के अण्डों के बीच आ गया. कुछ दिनों बाद उन अण्डों में से चूजे निकले, बाज का बच्चा भी उनमे से एक था.वो उन्ही के बीच बड़ा होने लगा. वो वही करता जो बाकी चूजे करते, मिटटी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्हीकी तरह चूँ-चूँ करता. बाकी चूजों की तरह वो भी बस थोडा सा ही ऊपर उड़ पाता , और पंख फड़-फडाते हुए नीचे आ जाता . फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा, बाज बड़े शान से बेधड़क उड़ रहा था. तब उसने बाकी चूजों से पूछा, कि-
” इतनी उचाई पर उड़ने वाला वो शानदार पक्षी कौन है?”
... तब चूजों ने कहा-” अरे वो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही ताकतवर और विशाल है , लेकिन तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम तो एक चूजे हो!”
बाज के बच्चे ने इसे सच मान लिया और कभी वैसा बनने की कोशिश नहीं की. वो ज़िन्दगी भर चूजों की तरह रहा, और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया.
दोस्तों , हममें से बहुत से लोग उस बाज की तरह ही अपना असली potential जाने बिना एक second-class ज़िन्दगी जीते रहते हैं, हमारे आस-पास की mediocrity हमें भी mediocre बना देती है.हम में ये भूल जाते हैं कि हम आपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी हैं. हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं है,पर फिर भी बस एक औसत जीवन जी के हम इतने बड़े मौके को गँवा देते हैं.
आप चूजों की तरह मत बनिए , अपने आप पर ,अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिए. आप चाहे जहाँ हों, जिस परिवेश में हों, अपनी क्षमताओं को पहचानिए और आकाश की ऊँचाइयों पर उड़ कर दिखाइए क्योंकि यही आपकी वास्तविकता है.